बूंद-बूंद के लिए तरसती राजधानी... दिल्ली के 8 ड्राई जोन, जिनकी प्यास सिर्फ टैंकरों से बुझती है

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दिल्ली-NCR में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच कई इलाकों में पानी की किल्लत भी देखने को मिल रही है. लोग टैंकर के इंतजार में घटों तक सड़कों पर इंतजार करते नजर आ रहे हैं. हालत इतनी खराब है कि लोग अपने घर छोड़कर कहीं और जाने की बातें तक कहने लगे हैं. भीषण गर्मी के बीच पीने के पानी की किल्लत ने लोगों को मुश्किल में डाल दिया है.

सिर्फ प्राइवेट टैंकर का ही सहारा

देवली विधानसभा इलाके नूरानी मस्जिद के पास भी पानी की भीषण किल्लत है. यहां के लोगों के सामने सिर्फ और सिर्फ प्राइवेट टैंकर ही सहारा है. वह भी कई दिनों पर आते हैं. किसी से हजार किसी से 1500 जब जैसी डिमांड होती है उसके हिसाब से वह पैसे लिए जाते हैं. एक टैंकर 2000 लीटर पानी उपलब्ध कराता है. नूरानी मस्जिद के पास वाली गली में लोग काफी परेशान हैं. इनका कहना है दो दिन के बाद बकरीद आने वाली है, लेकिन पानी नहीं है. कैसे त्यौहार मनेगा यह पता नही है. पानी ना होने के कारण हम लोग 15-15 दिन के बाद नहा रहे हैं.

पानी की वजह से छोड़ा घर

इस इलाके के ही रहने वाले शमशाद अली का कहना है कि पानी की वजह से कई लोगों ने घर छोड़ दिया है. ना पीने के लिए पानी है, ना नहाने के लिए और ना ही कपड़े धोने के लिए पानी है. सरकारी दफ्तर के अधिकारी और विधायक सब बहकाकर वापस भेज देते हैं, लेकिन इंतजाम कुछ नहीं हुआ. हरिशंकर का कहना है कि खाने-नहाने और धोने के लिए पानी नहीं है. मजबूरन 25 रुपए का बिसलेरी का पानी लेकर आते हैं. कई बार मजबूरन उसी का इस्तेमाल धोने के लिए करना पड़ता है.

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17 दिन के बाद नहा पाई महिला

नसीम कहती हैं, पानी है नहीं, सोच रहे हैं सब छोड़कर वापस गांव चले जाएं. अभी कुछ दिन पहले ही गांव से आए हैं, लेकिन यहां दिक्कत है. आदमी बीमार है, 17 दिन के बाद कल नहाए हैं. सरकारी पानी नहीं है, ना ही सरकारी टैंकर है. 1000 से 2000 में प्राइवेट टैंकर आता है. वहीं, हसीना का कहना है कि टैंकर के लिए बोलते-बोलते थक गई हूं. बहुत लोग गांव चले गए, वह भी सोच रही हैं यहां रहना अब मुश्किल है. वही नसरीन का कहना है बस ऐसे ही गुजारा कर रहे हैं, थोड़ा-थोड़ा पानी इस्तेमाल करके.

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चार ट्यूबवेल की जरूरत, हैं सिर्फ दो

लोगों ने बताया कि जो बोर का कनेक्शन गली में है, वह बंद रहता है. उसपर ताला लगा होता है. क्योंकि पानी सबको मिलने के लिए चार ट्यूबबेल की जरूरत है, इलाके में दो ही ट्यूबवेल है. जिन्होंने इसे लगवाया है, वह ताला लगाकर रखते हैं. उनका कहना है, पानी होगा तभी दिया जाएगा.

इस बीच आइए आपको बताते हैं कि आखिर दिल्ली के किन इलाकों में पीने के पानी की सप्लाई टैंकरों से की जाती है और इन इलाकों में आखिर टैंकर भेजने की जरूरत क्यों पड़ती है.

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1. दिल्ली में टैंकर से पानी सप्लाई की क्या स्थिति है?

- दिल्ली जल बोर्ड के पास 1000 टैंकर हैं, जो दिन भर में करीब 6 से 8 ट्रिप पूरी दिल्ली में लगाते हैं. इमरजेंसी स्थिति में दिल्ली जल बोर्ड पानी के टैंकर हायर भी करता है. इन टैंकर्स में सिर्फ और सिर्फ पीने का पानी होता है. क्योंकि ज्यादातर बोरवेल से निकलने वाला पानी खारा होता है और उसे लोग घर के अन्य कामकाज में इस्तेमाल करते हैं.

2. किन इलाकों में सप्लाई, टैंकर से पानी की कितनी आपूर्ति करता है DJB?

- टैंकरों से पानी की सप्लाई नॉर्थ वेस्ट दिल्ली, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, साउथ-ईस्ट दिल्ली, नई दिल्ली, सेन्ट्रल दिल्ली, वेस्ट दिल्ली और द्वारका जैसे इलाकों में होती है. दिल्ली में लगभग 1000 एमजीडी पानी को ट्रीट कर पीने लायक बनाया जाता है. इसमें टैंकर से 5 एमजीडी पानी की ही आपूर्ति होती है.

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3. टैंकर से पानी भेजने की जरूरत क्यों होती है?

- दिल्ली की ज्यादातर झुग्गियों और कच्ची कॉलोनियों में पानी की सप्लाई टैंकर से होती है. इन इलाकों में पानी की पाइपलाइन नहीं है. दिल्ली जल बोर्ड ऐसे इलाकों में लोकल लोगों से बातचीत करके एक पॉइंट निश्चित करता है, जहां रोजाना पानी का टैंकर पहुंचाया जाता है. साथ ही, अगर किसी इलाके में पानी की पाइपलाइन से सप्लाई नहीं हो पाई है तो उन इलाकों में भी टैंकर की मदद से पानी भेजा जाता है.

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4. क्या टैंकर सिर्फ गर्मियों में भेजा जाता है?

- वॉटर टैंकर की डिमांड गर्मियों के दिनों में बढ़ जाती है. हालांकि, जिन इलाकों में पाइपलाइन नहीं है वहां पर साल भर टैंकर की मदद से पानी की सप्लाई होती है.

5. क्या सप्लाई का जिम्मा DJB के अलावा निजी एजेंसियों के पास भी है?

- पानी की सप्लाई करने की पूरी जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड की ही है. टैंकर कहां-कहां जाएगा, यह भी DJB ही तय करती है. हालांकि, सप्लाई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टैंकर हर महीने प्राइवेट लोगों से हायर किए जाते हैं. सभी टैंकर दिल्ली जल बोर्ड के नहीं होते हैं. अलग-अलग प्राइवेट कंपनियों के टैंकर मासिक आधार पर रिन्यू होते हैं. इन सभी टैंकर में जीपीएस लगा होता है.

(इनपुट: अमरदीप कुमार)

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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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